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Monday, 21 December 2015
हिज़्र का शायद उसे मलाल भी नहीं
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Monday, 2 November 2015
दिल अब जिन्दा नहीं हो रहा
दुनिया में क्या-क्या नहीं हो रहा
इक बस वो ही मेरा नहीं हो रहा
वो ना मिला तो मर ही जाऊँगा
मैंने जो भी था सोचा नहीं हो रहा
आहिस्ता-आहिस्ता तमाम हो रहा है
दिल उससे लेकिन जुदा नहीं हो रहा
तग़ाफ़ुल बस इकरारे-इश्क़ से है अब
मैं तुमसे लेकिन बेवफा नहीं हो रहा
बारहा कर चुका हूँ कोशिशें "आकाश"
दिल लेकिन अब जिन्दा नहीं हो रहा
Thursday, 29 October 2015
इन काले गहरे अंधेरों में, मैं तुम्हें ढूंढा करता हूँ
हर कोई दिल में वो मुक़ाम नहीं पाया करता
हर किसी को आने की मन इजाज़त नहीं दिया करता
मैं भी चाहता तो हूँ किसी का अब होना लेकिन
मुझे तुझ-सा और कहीं, कोई नहीं मिला करता
मेरे पास तो ऐसा भी कोई अहबाब नहीं,
जिससे कर सकूँ तेरी बात मैं
ग़म फ़िराक़ का सताए तो,
काट सकूँ वो शब किसी का पकड़ के हाथ मैं
मेरी तो दास्ताँ ही इतनी,
के तुमसे मोहब्बत करता था, करता हूँ
ख़्वाब वही तुम्हारे साथ जीने के,
मैं बुनता था, बुनता हूँ
इन काले गहरे अंधेरों में, मैं तुम्हें ढूंढा करता हूँ
इक बार तुमसे मिलने को, मैं बेतहाशा तड़फा करता हूँ
,मैं आज भी नाम तुम्हारे ही, सब गीत लिखा करता हूँ
सब गीतों में तुम्हें अपना, मैं मीत लिखा करता हूँ
Wednesday, 28 October 2015
अब ये पथ छोड़ना आसान नहीं
डूब चुका अब तो मन प्रेम में
अब ये पथ छोड़ना आसान नहीं ।
अब तो चाहे-
जियूँ या मरुँ,
मुरझाऊँ या खिलूँ ,
जीतूँ या हारूँ,
दिलों के इस खेल में ।
अब ये पथ छोड़ना आसान नहीं ।।
जीवन चाहे कितना भी है
तुम बिन अधूरा तो है
वक्त जो कहीं नहीं ठहरता
मेरे दिल में ठहरा तो है
हिस्से में चाहतों का समंदर ना सही
यादों का सहरा तो है
हासिल चाहे कुछ भी ना हुआ हो
एहसास लेकिन गहरा तो है ॥
प्रेम की एक बूंद ही -
काफ़ी होती है जीने के लिए,
हर घाव को भरने के लिए,
दिलों के खिलने के लिए,
दुखों की तपती रेत में
अब ये पथ छोड़ना आसान नहीं ।।
चाहे कितना भी कहूँ संक्षेप में
अब ये पथ छोड़ना आसान नहीं ।।
शायर: "आकाश"
Tuesday, 27 October 2015
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