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Monday, 21 December 2015
हिज़्र का शायद उसे मलाल भी नहीं
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wo rokta bhi nahi tokta bhi nahi
Thursday, 17 December 2015
Monday, 14 December 2015
Monday, 7 December 2015
तुमसे बिछड़कर हमने खुद को
तुमसे बिछड़कर हमने खुद को कोसा बहुत है
ज़हन से तुम्हारा उतरना अब कहाँ रहा मुमकिन
तुम्हारे बारे में हमने सोचा बहुत है
अदालतें हैं उसकी इंसाफ क्या होंगें
हक़ में फिर भी हमने बोला बहुत है
दिल तो करे है छोड़ ही दे तुम्हें
हमने ही लेकिन इसे रोका बहुत है
ये अलग बात के उससे इकरार नहीं करते
Friday, 27 November 2015
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